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गंगा के रास्ते ज्ञानवापी जाएंगे 71 संत, शुभ पुष्य नक्षत्र में करेंगे ‘शिवलिंग’ का अभिषेक

गंगा के रास्ते ज्ञानवापी जाएंगे 71 संत, शुभ पुष्य नक्षत्र में करेंगे ‘शिवलिंग’ का अभिषेक

ज्ञानवापी विवादित ढांचे के सर्वे के दौरान सामने आए ‘शिवलिंग’ की पूजा को लेकर काशी के संत अड़े हुए हैं. जहां आज काशी में धर्म परिषद का आयोजन कर 22 प्रस्ताव पारित किए गए, वहीं शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने अपने शिष्यों को 4 जून को शिवलिंग का जलाभिषेक करने का आदेश दिया है. वहीं इस कार्यक्रम की घोषणा के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है.

मीडिया रिपोर्ट कहा जा रहा है कि इस आदेश के बाद शंकराचार्य स्वरूपानंद के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अभिषेक की तैयारी शुरू कर दी है. कल सुबह से ही वाराणसी में हंगामा होगा क्योंकि संतों का काफिला 4 जून 2022 को सुबह 8:30 बजे ज्ञानवापी विवादित ढांचे की ओर बढ़ेगा.

कहाँ कहा जा रहा है कहा जाता है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस पूजा की पूरी तैयारी कर ली है। इसके लिए शुभ पुष्य नक्षत्र में संतों के काफिले को ज्ञानवापी की ओर ले जाने का निर्णय लिया गया है. कल सुबह 8.30 बजे संत गंगा के रास्ते ज्ञानवापी के लिए प्रस्थान करेंगे। जिसमें पूरे 71 संत शामिल होंगे और 64 प्रकार की थाली सजाई जा रही है और 64 तरीकों से अभिषेक की तैयारी की जा रही है।

हालांकि, यह भी बताया जा रहा है कि प्रशासन ने कार्यक्रम को रद्द करने के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वर नंद के साथ बातचीत शुरू कर दी है। लेकिन अभी तक ऐसा कोई फैसला सामने नहीं आया है।

वहीं इस पूरे मामले को लेकर अविमुक्तेश्वर नंद ने कहा, ”कार्यक्रम को लेकर प्रशासन उनके पास आने लगा है. उन पर कार्यक्रम रद्द करने का दबाव है लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि कार्यक्रम रद्द नहीं किया जा सकता है लेकिन प्रशासन अगर संख्या की बात करना चाहे तो किया जा सकता है.

गौरतलब है कि इससे पहले कल मीडिया से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कहते हैं कि भगवान विश्वेश्वर स्वयं ज्ञानवापी में प्रकट हुए हैं और अब उनके स्नान, श्रृंगार, पूजा और राग-भोग की बहुत जरूरत है. जो भगवान की प्राण प्रतिष्ठा मूर्ति है वह तीन साल के बच्चे के समान है। जैसे 3 साल के बच्चे को बिना स्नान, भोजन आदि के अकेला नहीं छोड़ा जा सकता, वैसे ही वे भी हैं।

उन्होंने कहा, “अब जब प्रभु प्रकट हुए हैं, तो उनकी सेवा करना हमारा कर्तव्य है, अन्यथा हम पाप के दोषी होंगे।” वहीं 4 जून की पूजा को लेकर संत ने कहा कि हमारे शास्त्रों में ‘स्थप्यं संप्यं शनि-भुमवरे’ कहकर शनिवार को सबसे शुभ दिन माना गया है.

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